स्कूल के बच्चों से, अभिभावकों की निजी जानकारी इकठा कर, केजरीवाल कर रहे वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के झूठे फोन कॉल

Written by Gyanendra Giri

केजरीवाल के धोखाधड़ी के लिस्ट में एक और नाम जुड़ गया है। केजरीवाल की दिल्ली सरकार द्वारा स्कूलों के बच्चों और उनके अभिभावकों के एपिक नंबर, मोबाइल नंबर, नाम पता आदि की निजी जानकारी को एकत्रित करके वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के झूठे फोन कॉल किये जा रहे है।

चुनाव आयोग ने भी दिल्ली सरकार को एक नोटिस जारी किया है जिसमे यह सारी जानकारी तुरंत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को वापिस जमा करवाने को कहा गया है।

इस सम्बन्ध में पंत मार्ग स्थित दिल्ली भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर एक प्रेस वार्ता को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री विजेंद्र गुप्ता ने सम्बोधित किया।

प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय ने 11 सितम्बर, 2018 को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमे अभिभावकों की निजी जानकारी एकत्रित करने को कहा गया था और यह काम एक निजी एजेंसी द्वारा करवाया जाना था। उन्होंने कहा कि यह निजता के अधिकार का सीधा उलंघन है।

भाजपा का विधायक दल इस सम्बन्ध में चुनाव आयोग के अधिकारीयों से मिला था और पत्र लिखकर केजरीवाल सरकार की शिकायत की थी जिसके बाद चुनाव आयोग ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखा और कहा कि स्कूल या किसी और एजेन्सी के माध्यम से दिल्ली सरकार ऐसा कोई डेटा इकट्ठा नहीं कर सकती यह केवल चुनाव आयोग का अधिकार है।

चुनाव आयोग ने दिल्ली सरकार से 3 मुख्य बातें कही हैं –

  1. चुनाव आयोग ने कहा कि व्यक्ति का एपिक डिटेल नहीं बदलता वह यथोचित रहता है। उसका व्यक्ति के पते से कोई सम्बन्ध नहीं है।

  2. दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 11 सितम्बर, 2018 को इस सम्बंध में जारी सर्कुलर को तुरंत रद्द किया जाए।

  3. जो भी डेटा उन्होंने इकट्ठा किया है उसको तुरंत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को वापिस जमा करवाया जाये। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये कि यह जानकारी किसी के हाथ न लगे।

इस मुद्दे पर दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर वो काम कर रही है जिससे लोगों को भ्रम में डाल कर के, नीतियों और कानून का उलंघन करके अपने को खड़ा रखें। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हमारी ये जागरूकता इनके झूठतंत्र को रोकने में कामयाब होगी। श्री तिवारी ने कहा कि हमसे इस सम्बन्ध में नजाने कितने अभिभावकों ने, विद्यार्थियों ने अपनी बातें साझा की और वह ये बताते हुए बहुत दुखी दिखे कि जबरन आम आदमी पार्टी लोगों को प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्ली की जनता का डाटा कलेक्ट करके उसको अपने निजी फायदे के लिए प्रयोग कर रहे हैं।

श्री तिवारी ने कहा कि स्कूल के बच्चों से उनकी और उनके अभिभावकों-रिश्तेदारों की एपिक डिटेल, मोबाइल नंबर आदि की जानकारी लेने के सम्बन्ध में ये जो आर.टी.आई. निकली है, जो नोटिफिकेशन आया है उसके माध्यम से हमने निश्चय किया है कि ऐसी बातें लोगों को बताई जाएँ, क्योंकि कभी-कभी लोगों के ध्यान से निकल जाती है।

मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी द्वारा बुधवार को की गयी प्रेस वार्ता का जिक्र करते हुए बताया कि आम आदमी पार्टी ने वार्ता में कहा है कि हाँ हम फोन कर ही रहे हैं। श्री तिवारी ने कहा कि उन्होंने ये तो मान लिया है कि वो फोन कर रहे हैं लेकिन अब सवाल ये उठता है कि क्या वोट कटवाने और जुड़वाने का काम कोई व्यक्तिगत स्तर पर कर सकता है क्या? नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, उसी के तहत ही वोट जुड़ सकता है और वोट कट सकता है।

श्री तिवारी ने कहा कि केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हुये कहा था कि 30 लाख वोट दिल्ली से काट दिये गये हैं लेकिन इसके विपरीत चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि 1.5 लाख नये मतदाता सूची में शामिल किये गये हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार के लोग लोगों को फोन करके उनके वोट काटने का आरोप बीजेपी पर लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि केजरीवाल ने जुड़वा दिया है।

सोशल मीडिया पर भी ऐसे ही एक झूठे फ़ोन कॉल का ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमे आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता कॉलर को बताता है की बीजेपी ने उसका नाम वोटर लिस्ट से कटवा दिया है, और बोलता है की केजरीवाल उसका नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा देंगे. इसपर कॉलर बताता है की उसका नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटा है और केजरीवाल के आम आदमी पार्टी के खिलाफ, पुलिस में रिपोर्ट करने की बात करता है.

मनोज तिवारी ने कहा कि हम चुनाव आयोग तक जायेंगे और इनकी सारी कमियों की चर्चा करेंगे और आम आदमी पार्टी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक अभिभावकों को और दिल्ली की जनता को न्याय न मिल जाये।

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